समीक्षा एक प्रेम दर्शन है

मुक्तिबोध प्रगतिवादी नहीं रह गए। मार्क्सवादी बने रहे। दोनों में विरोध कुछ लोगों को दीख सकता है। लेकिन मुक्तिबोध के अनुसार मार्क्सवादी होने के कारण ही वे प्रगतिवाद के दायरे से आगे निकल सके। प्रगतिवाद एक समय के बाद एक आग्रह जैसा बन कर रह गया था। एक मायने में दुराग्रह। कम से कम मुक्तिबोध … Continue reading समीक्षा एक प्रेम दर्शन है →

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